#Kavita by Ajay Jaihari Kirtipad

कवियों पर जीएसटी—-

 

अठारह प्रसेन्ट

…जीएसटी लगाकर।

क्या कवियों की

………..जान लोगों।

साहित्य को उखाड़

….फैकोगों जमी से।

या कवियों के मकान लोगे

 

अठारह प्रसेन्ट——————-

 

नव सृजनकर्ता

…..सब मारे जायेंगे।

जिस दिन सरकार द्वारा

कवियों के कपडे़ भी।

उतारे जायेंगे

…और कलम पर भी।

लगेगा टेक्स…..

किताबों से पन्ने फाडे़ जायेगें।

हो गया नाटक बहुत

………सरकार का।

अब क्या दान लोगे।

 

अठारह प्रसेन्ट——————-

 

हो जायेंगे पुरस्कार सारे बंद

साहित्य संस्थाएं होगी बेदम।

बेरोजगार कवियों को

भला तुम कैसे काम दोगे।

छीन लोगे खून पसीने की

…..सारी कमाई।

क्या कागज पल लिखा

कोई फरमान लोगे।

 

अठारह प्रसेन्ट——————-

 

जिसकी रोजी रोटी

चल रही हो आवाम से।

कवियों ने दु:ख दर्द दूर किये

देश की जनता के।

बड़े आराम से…………

कुछ को चुकानी होगी।

इसकी कीमत

कुछ को मारकर तुम।

मनोरंजन टेक्स के नाम पर

कवियों की जान लोगों।

 

अठारह प्रसेन्ट——————-

 

गर कोई देना चाहेगा

साहित्यिक सहयोग।

वो भी अब ठान लेगा

आगे से न होगा।

कोई आयोजन मान लेगा

घर बैठे बैठे जनता।

हो जायेगी बोर

क्या बच्चों की जान लोगे।

 

अठारह प्रसेन्ट——————-

 

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