#Kavita by Ajay Jaihari Kirtipad

जीवन का अनुभव………..

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कल तक थे जो खास

वो आम हो गये।

दूर पेड़ों पर लटकने वाले

फल आम हो गये।

और किनारा कर गये

कुछ लोग हमसे इस कदर।

कल थे राह के पत्थर आज

आज भगवान हो गये।

और मालूम था हमें

मिलेगा ये सबब।

खामखाह आपस में

……………. उलझकर।

रिश्ते बदनाम हो गये।

और निकला था सबको।

एक साथ लेकर चलने को

……………ऐ मेरे खुदा।

कल तक थे इंसान।

आज हिन्दू मुसलमान हो गये।

 

कवि अजय जयहरि कीर्तिप्रद

 

 

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