#Kavita by Ajay Jaihari Kirtiprad

आपका आशीर्वाद—–

कलतक थी घोटी आज पैनी है धार
आप सभी ने खोले मेरे लिए शुभकामनाओं
के द्वार
छू रहा हूँ आसमां बड़ रहा है कारवाँ
बस यूँ मिलता रहे मुझे
आप लोगों का प्यार
–कलतक थी घोटी–

छूने को मंजिल में हूँ तैयार
किसी ने दी दुआएँ तो किसी को है
जीत का इंतजार
दुश्मन एक हो या हो दो चार
जीतूँगा हर मुकाबला नहीं मानूंगा हार
मरना पड़े तो मरुँगा सौ बार
–कलतक थी घोटी–

होने लगा है जीत से प्यार
रखती है जो मुझे हर पल तैयार
हो जायेंगे टुकड़ उसके हजार
जो करेंगा हमपर भूले से भी वार
दो नहीं दोस्तों हमारी आँखे हैं चार
–कलतक थी घोटी–

कवि अजय जयहरि कीर्तिप्रद

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