#Kavita by Ajeet Singh Avdan

श्रीगणेश-नामोस्तुति

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गौरीसुत गजानन नाम जप वंदन,

बुद्धि-चित शुद्ध-भाव लाय नित कीजिए ।

श्रीगणेश एकदंत दयावंत की अनंत,

महती कृपा का फल, तत्काल लीजिए ।।

 

बुद्धिनाथ धूम्रवर्ण भालचन्द्र गजकर्ण,

सूपकर्ण शशिवर्ण लम्बकर्ण रीझिए ।

गणपति गणाध्यक्ष गजवक्र एकाक्षर,

बुद्धिप्रिय बुद्धि की अशुद्धि शुद्ध कीजिए ।।

 

अमित अखूरथ अनन्तचिदरूपम : ,

ओमकार अवनीश शुभाशीष दीजिए ।

विश्वमुख वरप्रद विघ्नराज हे विकट,

विनायक विघ्नेश्वर विघ्न हर लीजिए ।।

 

मुक्तिदायी मनोमय मूढ़ाकर मृत्युञ्जय,

हेरम्ब हरिद्र क्षेमंकरी क्षमा दीजिए ।

उमापुत्र उद्दण्ड तरुण नादप्रतिष्ठित,

शुभगुणकानन सुमुख शुभ कीजिए ।।

 

कृष्णपिंगाश कवीश कीर्ति कपिल : ,

सर्वसिद्धान्त देवेन्द्राशिक को नमन ।

भूपति ईशानपुत्र दूर्जा : शुभम : ,

नमस्थेतु सिद्धिदाता सर्वदेवात्मनन ।।

 

पीताम्बर पुरुष प्रमोद विद्यावारिधि : ,

गणाध्यक्ष गदाधर द्वैमातुर हे गुणिन ।

यशस्विन यशस्कर यज्ञकाय योगाधिप,

वरदविनायक देवव्रत को नमन  ।।

 

सर्वेश्वर स्वरूपस्कन्दपूर्वज: ,

देवांतकनाशक देवपति वन्दन ।

वीरगणपति प्रभु कृपाकर धार्मिक,

बुद्धि के विधाता रूद्र के प्रिय नंदन ।।

 

प्रथमेश्वर नंदीश्वर विश्वराज,

रिद्धि-सिद्धिप्रिय रिद्धि-सिद्धि मन चन्दन ।

विघ्नराजेन्द्र चतुर्भुज अलम्पता,

क्षिप्रा भीम को असीम अवदान वंदन ।।

 

…अवदान शिवगढ़ी

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