# Kavita by Ajeet Singh Avdan

नील-छन्द

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नैनन से नित दामिनि की छवि आवनि को ।

देखि मनोहर ओंठ सजी मुस्कावनि को ।।

माधव के अध गाल गुलाल रचावनि को ।

मातु पिता तकि बाल कला दर्शावनि को ।।

 

कुञ्चित केश कपोलन हाथ हटावन को ।

धूलि सने कर माधव माथ लगावन को ।।

ज्यों अवदान लुभावत केशव हैं मन को ।

को हिय काठ सरीखन नाहिं जुड़ावन को ।।

 

…अवदान शिवगढ़ी

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