#Kavita by Ajeet Singh Charan

कभी जो मैं

न दें पाउं जवाब

तेरी बातों का

कर न पाउं सराहना

तेरे उत्साह की

काम की ,जज्बे की

या फिर

कभी बेवजह ही कर दूं

आलोचना

गिनाने लगूं दोष

झूठे छंद मात्राओं के

या ये कहूं

तुम नहीं हो इस लायक

कि कुछ कर सको

कभी कभी

दुर्भावना से

करने लगूं

झूठी वाह वाह

पढने लगूं कसीदे

तुम्हारी होशियारी के

तुम्हारी चेतना

और प्रतिभा के

तो खुश मत होना

गर्व मत करना

चढ न जाना

काल्पनिक शिखर पर

बस इतना याद रखना

प्रतिभा ईश्वर ने दी है

मित्र प्रेम से मिले हैं

इन्हें सहेज कर रखना

ये नमक है धरा का

सब वाहवाही

खुशियां इनसे ही है

कोई झूठा अभिमान

मत रखना

किसी को गले न लगा सको

इतना

गुमान मत रखना

 

✍अजीत सिंह चारण

.   रतनगढ (चूरु)

9462682915

 

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