#Kavita by Akash Khangar

बेहतर है कुछ दिनों तंगी से जूझना

सब कुछ तो देख लिया है बूढ़ी आँखो ने

एक बार और भरोशा करते है आओ

प्रधान सेवक की बातों में

अगर बदलाव की उम्मीद है

तो ये उम्मीद कायम रहने दो

जो कर न सकें कुछ देश हित में

उन्हें जो कहना है कहने दो

जिसने आपने लिए कुछ न रखा

निश्चित ही वो ईमानदार है

बाकि तो राजनीती है बेईमानो की

हर नेता भी बेईमान है…आकाश खंगार

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