# Kavita by Akash Khangar

इबारतें लिखी थी कही प्यार की विश्वास की

अनकहे अहसास की

मेरे अपने वजूद की

हमारे ख्वाव की

न जाने क्यों मिट रही है तेरे दिल से

लिखावट मेरे प्यार की

हसरत मेरे साथ की

चलो न फिर मोहब्बत कर ले

फिर पीर की इबादत कर ले

भीगी रात को महकाये फिर हम तुम

चलो एक रात साथ साथ बसर कर ले

कुछ देर छोड़ दो न शिकायतों को वक़्त पर

इस लम्हे को जीकर, कुछ शिकायत कंम कर ले

फिर एक बार होंठो से लगा लो तुम

फिर आगोश में दबा लो तुम

फिर तुम थोड़ा नाराज हो जाओ मुझसे

फिर हम तुममे थोड़ा दखल कर ले…आकाश खंगार

 

 

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