#Kavita by Akash Khangar

लोग पूछते है सारी रात जागकर क्या करता हूँ

क्यों अपनी रातो की नींद बर्बाद करता हूँ

उन्हें कैसे बताऊँ ये बात मेरे यार

अपनी गलतियों पर खूब पछताता हूँ

खुद से खुद की लड़ाई लड़ता हूँ

कभी खुद ही बनता मुजरिम

कभी बेगुनाह बनता हूँ

मैं रोज मिलता हूँ खुद से

बुनता हूँ कोई माला हर रात

फिर सुबह होने तक मोतियो सा बिखरता हूँ

अब न पूछना कभी मुझसे ये

मैं तुमसे नही अपने आप से डरता हूँ

हाँ सारी रात मैं जीता हूँ

हाँ सारी रात मैं मरता हूँ…आकाश खंगार

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