#Kavita by Akhil Umrao

” जब मेरी जीत सुनिश्चित है ”

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अन्तर्मन पर गहन व्यथा का
एक प्रभावी घेरा था ।
और निराशा ने उम्मीदों
पर फिर पानी फेरा था ।।

सब सपने झूठे लगते थे,
और आगे कुछ न दिखता था ।
सर्वत्र निराशा दिखती थी,
और ध्यान कहीं न टिकता था ।।

सब बाधाओं को काटा था ,
सारे पथ पर सन्नाटा था ।
जो मिली विफलता आज मुझे,
मेरे गालों पर चाटा था ।।

किस्मत से भी धोखा खाया,
और समय संग में चला नहीं ।
उत्प्लावित मन ये सदा रहा
शोलों में तपकर जला नहीं ।।

असफलता से टकराया,
पर उसके आगे झुका नहीं ।
शूल मिले पथ में असंख्य,
अविरत चलकर मैं रुका नहीं ।।

कब निशा भोर को रोक सकी,
ये रीति सदा से निश्चित है ।
किसलिए हारकर बैठूं मैं,
जब मेरी जीत सुनिश्चित है ।।

अभिलाषा है कुछ करने की,
पर मंजिल दुष्कर लगती है ।
मैं जितना आगे बढ़ता हूं,
मंजिल भी आगे भगती है ।।

कुछ हाथ नहीं हासिल होता
मुट्ठी बंधकर रह जाती है ।
तू पाएगा अपना मुकाम
आशा आकर कह जाती है ।।

कितने दिन से ये लगा हुआ,
लोगों के ऐसे सुन ताने ।
मन रूदन करने लगता है,
कब समय आएगा हरि जाने ।।

फिर भीड़ नहीं अच्छी लगती,
मन एकाकी हो जाता है ।
अणुबम गिरता आशाओं पर
मन नागासाकी हो जाता है ।।

है आज गर्म,कल वर्षा है ,
बाद इनके शीत सुनिश्चित है ।
किसलिए हारकर बैठू मैं,
जब मेरी जीत सुनिश्चित है ।।

अरमानों को अर्थी देकर
जो बेबस व लाचार हुआ ।
सब अटल इरादे डगमगाए,
और सपनों का संहार हुआ ।।

चीटी दाना लेकर चलती
पानी पत्थर को तोड़ रहा ।
नववर्ष बनाने की खातिर
फिर मास दिवस को जोड़ रहा ।।

तू मानव है पहचान शक्ति,
किसलिए यहां और है तू कौन .?
क्यों शिथिल और असहाय हुआ,
क्यों साध रखा है तूने मौन ..!

है दिल में अगणित शब्द तेरे,
पर मुंह से उनको बोलो तो ।
सर्वस्व उजाला है व्यापित,
पर नयन पृष्ठ तुम खोलो तो

आंखों में नई चेतना ले
मैं जागूंगा, मैं भागूंगा ।
हो सूर्य अस्त हो चन्द्र पस्त,
खुद जल अंधियार मिटा दूंगा ।।

सर्वस्व विजय होगी मेरी
फिर मेरी कीर्ति सुनिश्चित है ।
किसलिए हारकर बैठूं मैं,
जब मेरी जीत सुनिश्चित है ।।

– कवि अखिल उमराव
अमौली-फतेहपुर

3 thoughts on “#Kavita by Akhil Umrao

  • October 15, 2018 at 3:00 pm
    Permalink

    Mastt
    Awesome
    Jhakkas

  • October 15, 2018 at 4:09 pm
    Permalink

    अतिसुन्दर पंक्तियाँ मेरे भाई

  • October 27, 2018 at 4:37 am
    Permalink

    Nice poems
    Keep it continue

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