#Kavita by Alka Jain

 

चार लोग बुरा हमें पुकारते है यारों

बुरे फिर भी हम नहीं सनम मान

दिवानगी में तेरी गली के लाख चक्कर लगाते

लोगों ने पत्थर मारे आवारा समझ कर हाय

वादे पर तू न आई इंतजार से बैचेन हो

मैं अटरिया से निकल पड़ा आधी रात को सनम

कोतवाल ने अंदर किया चोर समझ कर

चार लोग हमें बुरा पुकारते हैं यारों बुरे फिर भी हम नहीं मान

पिता ने लड़की पसंद की मिल देख कर

शादी से इन्कार कर दिया मोहब्बत देख कर

बाप ने अंजुमन से निकाला बिगड़ा  बोल कर

मिलन की जब घड़ी आई सनम करीब

मैं काम छोड़ दोड़ा आया तेरी गली में

मालिक ने मुझे निकाला निकम्मा  बोल कर

चार लोग हमें बुरा  पुकारते है

बुरे फिर भी नहीं हम सनम मान

विषक__बुरे फिर भी नहीं हम

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