#Kavita by Alka Jain

कुहू कुहू बोले कोयलिया

 

बाबरी हुई काली कोयल बंजारे सी डोले

प्यार हुआ पहला पहला अनमोल बोले

धरती अम्बर से बोले कूहू कूहू सुनाती डोले

प्यार की मधुर धुन सुन सुन सखी

खटृटी अमिया मधुर मीठी होले

कोन गुरु की चेली काली कोयल बताओ

रियाज कहा कब करे निगोडी कोयल बताओ

प्यार की बोली होती अनमोल सखी

जो बोले सो पंडित हौले होले होले

कमी भुला हुनर निखारो लौगो

किस्मत पर रौना छोड़

मानव

बिदाई के समय पैगाम दे गई

अगलै बरस फिर आऊगी

खट्टी अमिया मधुर मीठी हो गी

पेड़ों की हिफाजत करना वृक्ष पर पक्षियों के बसेरे

 

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