#Kavita by Alok Shirivas

” कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान द्वारा फांसी की सजा दिए जाने पर मेरा आक्रोश ”

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पाकिस्तानी चेहरे पर एक, नया मुख़ौटा आया है।

एक हिंदुस्तानी को उसने, फिर जासूस बताया है ।।

 

 

कर के कपट उसने फिर एक, नया  शगूफा छोड़ा है।

अपनी समझ में उसने अपने, एटम बम को फोड़ा है।।

 

 

छल, छद्म और धोखे से, उसने मासूम फंसाया है।

सजा – ए – मौत झूठ की, बुनियाद पे दिलवाया है ।।

 

 

दे दी फांसी की सजा, उसने अब आनन-फानन में।

दिखा दिया है उसने कि, क्या है अब उसके मन में।।

 

 

जोर जुलम की आवाजें, अब वहाँ सुनाई देती है।

निर्दोषों के सर पे खुनी , ये खंजर  घुपाई  देती है।।

 

 

है वहाँ नहीं जम्हूरियत , बस ढोलें पीटी जाती है।

सेना के हाथों में सत्ता, चल रही ये दिखलाती है।।

 

 

कैसे जल रहा है जीवन, आके उनके घर में देखो।

तुमको क्या है तुम तो बस, अपनी ये आँखे सेंको ।।

 

 

खीज वो अपनी हार  की, वो ऐसे ही दिखलायेगा।

कुत्ते  की  वो  पूँछ है  टेढ़ी, सीधा न  हो  पायेगा ।।

 

 

दिखला दी है उसने अपनी, ओछी सी  औक़ात को।

बदल नहीं सकता वो अपनी, आतंकी की जात को।।

 

 

तेरे  उन्मादी  जेहाद  से, एक बेटा खो नहीं सकते।

बहुत बहा लिया है आँसू, अब और रो नहीं सकते ।।

 

 

अब कुछ भी हो जाए हम, अन्याय नहीं सहने वाले।

विश्व  पटल  के  नक़्शे पर ,अब तुम नहीं रहने वाले।।

 

 

एक जियाला कुलभूषण, फिर मिटने को तैयार है।

गर हो गई फांसी तो समझो, ये भारत  की  हार है ।।

 

 

चले चालें कूटनीति की या , करें युद्ध का शंखनाद।

करना पड़े जो भी चाहे,लेकिन हो जाधव आजाद।।

 

 

कुलभूषण जाधव को  अब, हमें न्याय दिलवाना है।

सकुशल मातृभूमि पे अपनी, उनको ले के आना है।।

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