#Kavita By Alok Srivas

“आतंकवाद के रुख पर देश के कर्णधारों को”

आतंकी से मानवता की , बात जो नेता करते हैं ।
वही कातिल उन वीरों के, व्यर्थ दोष जो मढ़ते हैं।।

करते देश की अगुवाई वो, सत्ता में जो बने हुए हैं ।
इन शहीदों की खूनों से , इनके हाथ सने हुए है।।

क्या ये पहली बार है जो, छाती पे चढ़ के वार किया।
हर बार वही भारत माँ के, माथे पे क्रूर प्रहार किया ।।

क्या हस्ती है उनकी जो , भारत माँ पे चढ़ आते ।
एक सिंह गर्जन से ही, नापाक जमीं में गड़ जाते ।।

क्या ये क्रंदन नहीं सुना, नहीं देखा आँसू धारों सी।
फिर भी खून नहीं ख़ौला, इस देश के कर्णधारों की।।

नन्ही बिटिया कहती एक बार, पापा को जिला दो।
है हिम्मत तो जाओ इनकी, आँखों में आँख मिला दो।।

गर सत्ता दी है तुमको तो , इनका भी इंसाफ करो ।
इन आतंकी को इनके ही, घर में जा के साफ करो।।

आतंक की है वही जात, वही धर्म , वही भाषा है ।
मानवता पर है कलंक, बस क्रूरता ही परिभाषा है।।

अगर शर्म बाकी तुममे तो, लाहौर पर वार करो ।
जहाँ पनपते हैं आतंकी , उनका तुम संहार करो।।

और दिखा दो भारत माँ को, तुम हो इनकी संतान।
सगर्व कर सके सिर ऊँचा, विश्व में फिर हिंदुस्तान।।

कायरता है कूटनीति ये, विश्व समर्थन जो मांगो।
बहुत हो गया नींद तुम्हारी, देश कह रहा अब जागो।।

अमेरिका ने क्या कभी , विश्व समर्थन माँगा था ।
जा कर के तालिबान, जहन्नुम में उनको टांगा था।।

है झलकता क्यों नहीं, तीव्र आक्रोश इन सांसो में।
चूड़ी डाल के बैठ गए, क्या शासक निज हाथों में।।

चुप्पी तुम्हारी दुनिया को, यही संकेत दिखलाएगी।
भारत माँ की संताने , कायर डरपोक कहलायेगी।।

गर तुम्हें गवारा है सुनना, तो सुनो खोल के कानों को।
उतर जाओ गद्दी से तुम, और सौंपो सत्ता जवानों को।।

फिर एक दिन में ही देखो, सारी दुनिया हिल जायेगी।
लाहौर, कराची को छोड़ो, पाकिस्तान ही मिल जायेगी।।

उनको उनके ही घर में, औक़ात दिखा दी जायेगी।
तब कलेजे में ठंडक , फिर हमको मिल पायेगी।।

जो हुए शहीद वतन पे, उनका एक ऋण चूका दें।
विश्व पटल से पाकिस्तान का, नक्शा ही मिटा दें।।

” आलोक श्रीवास “

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