#Kavita by alok trivedi

वापसी

खोजने जीवन की चाह,

जमा करने पूंजी आशा और विश्वास की

आज मैं जा रहा हूँ

देखने उन्हें

जिनसे मैं और मुझसे जो जीवित हैं

मिलने कुछ ख्वाहिशों से

अपने अहम् की थाह पाने

आज मैं जा रहा हूँ

ढूंढने अपनी उन यादों को

बचपने को तलाशने

यारों की यारी को सांत्वना देने

करने वादा अपने फिर लौटने का

आज मैं जा रहा हूँ

कुछ बूढ़ी आँखों में चमक जगाने

गाँव की मिट्टी को आँखों से लगाने

खलिहान के पत्तों को

खेतों की फसलों को अपनी फिर याद दिलाने

आज मैं जा रहा हूँ

पास की बगिया से आम चुराने

पड़ोसन चाची की डांट खाने

फिर से नदी मैं कूदकर नहाने

आज मैं जा रहा हूँ

खोजने पूंजी दादा की यादों की

बड़ों से आशीर्वाद लेकर छोटों को दिलाने

पीपल वाले मंदिर में श्रीहनुमान को मनाने

आज मैं जा रहा हूँ

कुलदेवता के चरणों में शीश नवाने

सुबह जल्दी न उठकर माँ को सताने

खुद रसगुल्ले छिप कर खाने

और छोटी का झूठा नाम लगाने

आज मैं जा रहा हूँ

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