#Kavita by Amit kaithwar mitauli

कदम कदम पर फूल मिले मुझको शूलों से प्यार हुआ.
मैंने तो सोंचा एक बार पर दर्द मुझे कई बार हुआ.
रोना है हंसना भी है गिरना है उठना भी है.
लेकिन इन हालातों से मुझको उबरना भी है.
लोगों ने कह डाला क्यों दर्द को पाले बैठे हो .
अब ऐसा लगता है दर्द का मेरे ऊपर अधिकार हुआ.
कदम कदम….
आ जाओ यदि तुम फिर से किस्मत ये बदल जाए.
टूटा पड़ा जो घर मेरा ये फिर से महल हो जाए .
जिस हाल में हो तुम आओ फिर से अपना लूंगा.
कसम मैं खाकर कहता हूँ आज फिर तुमसे प्यार हुआ.
कदम कदम…….
ये मेरा फ़ैसला दुनिया को सही नहीं लगता है.
पर सच पूछो तेरे बिन दिल न कही लगता है.
हो जाओ चाहें किसकी भी मेरी ही रहोगी तुम.
इसी बात को लेकर मेरे खिलाफ़ सारा संसार हुआ.
कदम कदम पर फूल मिले….
-अमित कैथवार मितौली खीरी –
-9161642312-

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