#Kavita by Amit Shukla ( Vishal Shukla )

सुकून देता है मजा और जीने को हर पहर।

जो रात में सोया नहीँ उसे क्या रात क्या सहर।

बाद मुद्दत हमको कोई पल अच्छा लगा।

उस पल से हमने कहा एक पल तो ठहर।

सिक्कों की चमक से हैं बस्तियाँ रोशन।

गरीब के लिये क्या गांव क्या शहर।

किनारों को अब छोड़िये घर जाईये अमित।

सूखा हुआ दरिया है कहाँ आयेगी लहर।

अमित शुक्ला

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