#Kavita by Anand Singhanpuri

कुछ तो कहो

दिल की हर दरवाजों पर,

प्यार दस्तक दे रखी हैं।

तू जरा मुड़कर होले देख,

ये कौन कमबख्त शीशे खोल रखी है।।

 

कभी हवाये और रुसवाईयां

आवाज लगाया करती हैं ।

हर शाम  दिल थक हार,

ये पैगाम फ़रमाया करती हैं।

 

जब तुम शर्माती अवगुंठन ले ,

आते जब कभी  झनकाती नृपुर  ।

तो आहटों तले मन

खिंचे ,

क्यों हो आतुर।।

 

और दिल में,

चुपके से दे थपकी।

भर होंठो पे

सिसकी।

और गुदगुदा कर कहें-

कुछ तो कहो।।।

 

कवि आनन्द सिंघनपुरी(kavi anand singhanpuri)

chhattisgarh.

 

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