#Kavita by Anand Singhanpuri

अंतर्ध्वनि

माँ

शब्द सिखाया नही जाता |

अन्तस् पटल से

निकली अंतर्ध्वनि

जब तीब्र गति से

निकला करती है |

आ ..आ..के

साथ

माँ

शब्द निकला करती है |

सुन माँ

के ह्रदय तल

रुदन भर लेती है |

बार – बार सुनने को

जी अपना करती है |

क्योंकि अपने लाल की

माँ शब्द मन को

आह्लादित कर जाती है|

सब पीडाओं को

सब बाधाओं को

सुन

सब हर लेती है |

——कवि आनंद सिंघनपुरी ,छत्तीसगढ़ |

 

 

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