#Kavita by Anand Singhanpuri

नव पहलुओं को रख हथेली में।

अतीत को साये तले

पहेली में।।

नव तरंगित उमंगे

रंग रंगोली में।

आशाओं की हर

हरेली में।।

नव पहलुओं को रख हथेली में।

अतीत को साये तले

पहेली में।।0।।

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भ्रमित विचलित पथगामी

सजग होजा वो राही।

तेरे आगे नव अवसर

दस्तक दे दुहरायी ।।

बसन्त की बहार

रुत की ओ अंगडायी|

आलापित भोर ध्वनि

फ़ाग की होली में।

नव पहलुओं को रख हथेली में।

अतीत को साये तले

पहेली में।।

आनंद मगन हो

दे ताली।

नव राग; नव साज

के साथ सजती थाली।

प्रफुल्लित हो मन नाच

उठा मतवाली।

नव वर्ष नव रंग बिखेरती

जीवन रोली में।

नव पहलुओं को रख हथेली में।

अतीत को साये तले

पहेली में।।

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