#Kavita by Anantram Chaubey

जिस घर में

जिस घर में बच्चे न हो
वो घर सूना लगता है ।
बच्चो की किलकारी से
घर में अच्छा लगता है ।
बच्चे घर की शान बढाते
सबको प्यारे प्यारे लगते ।
ऊधम करते शोर मचाते।
आपस में भी लड़ते झगड़ते
थोड़ी देर नाराज रहते है
फिर आपस में मिल जाते है ।
भाई भाई हो भाई बहन हो
फिर भी साथ में मिलकर रहते ।
सच बोलते साथ में रहते
झूठ कभी भी नही बोलते ।
अपने पराये का भेद न करते
ईश्वर का बच्चे रूप होते है ।
जिद भी बहुत वो करते है
माता पिता को उनकी जिद के
आगे अक्सर झुकना पड़ता है
जिद के आगे कभी कभी
सबसे मार भी खाना पड़ती है ।
जितनी पिता जिद पूरी करते
समझाने से समझ न पाये ।
फिर उनकी पिटाई होती है ।
लड़ते झगड़ते और पिटते है
फिर भी साथ में रहते है ।
माता पिता भले डांटते हो
पर ख्याल बच्चो का रखते ।
बच्चो के साथ में जब कोई
अनहोनी घटना घटती है।
चोट लगे वीमार पड़ जाये
बहुत ही चिन्ता होती है ।
बच्चो की खुशहाली से
घर में खुशियाँ होती है ।
जिस घर में बच्चे न हो
उस घर में सूना लगता है
बच्चो की किलकारी से
घर में अच्छा लगता है ।
अनन्तराम चौबे

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