#Kavita by Anantram Chaubey

बाल दिवस है

बाल दिवस है
प्यारा बचपन है ।
बच्चो की खुशियों
का नोनिहाल पन है ।
खेले कूदें बचपन में
घर द्वारे और आंगन में ।
भाई बहन छोटे छोटे है।
घर में आपस में खेलते है ।
एक खिलौना जो भी लेता
दूसरा भी उसको ही मांगता ।
खीचातानी आपस में करते
और खिलौने को है तोड़ते ।
थोड़ा लड़ते और झगड़ते
फिर मां से शिकायत करते ।
रोज का काम यही होता है
मां का प्यार दोनो पर होता है ।
लाड़ प्यार दोनो को करती
दोनो का झगड़ा सुलझाती है ।
बचपन में ऐसा ही होता है ।
चौदह नवम्बर का ये दिन
बाल दिवस का दिन होता है ।
बाल दिवस मनाया जाता है ।
एक जैसा सबका बचपन है
बचपन में ऐसा ही होता है ।
अब बचपन स्कूल में कटता
लोबर के जी अपर के जी मे
नौनिहाल इन बच्चो का
स्कूल में है एडमीशन होता ।

अनन्तराम चौबे
अनन्त

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