#Kavita by Anantram Chaubey

अज्ञानी बालक हूँ
एक अज्ञानी बालक हुँ
बस सादा जीवन जीता हूँ
ईश्वर में सदा विश्वास रखूँ
भजन पूजन सुबह करता हूँ ।
ईश्वर की जो इच्छा है
वही तो जग में होता है ।
किस्मत में जिसके जो लिखा है
वही त़ो होकर रहता है ।
आम जनता और ईश्वर का
एक छोटा सा सेवक हूँ
माँ सरस्वती का साधक हूँ
उनके चरणो में रहता हूँ ।
जो भी ज्ञान मैया देती है ।
शव्दो में जोड़कर लिखता हूँ
एक रचना जब बन जाती है ।
वाटशप के माध्यम से बस
सभी जगह पहुचा देता हूँ ।
पेपर में यदि छप जाती है
लाखो पढने वालो तक
यही ज्ञान की बात पहुचती है ।
ज्ञान जो माँ से मिलता है ।
ऐसे ही बांटता रहता हूँ ।
अज्ञानी बालक जो ठहरा
बस सेवा करता रहता हूँ ।
धर्म कर्म यही करता हूँ  ।
प्रभु की सेवा करता हू ।
एक अज्ञानी बालक हुँ ।
बस सादा जीवन जीता हूँ ।
सादा जीवन उच्च विचार
से अपना जीवन जीता हूँ ।
अनन्तराम चौबे
अनन्त

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