#Kavita by Anantram Chaubey

मानवता
संयम धैर्य नहीं है किसी में
बात बात में लड़ जाते है ।
भाई चारा नहीं किसी से
मतलब से मतलब रखते है ।
पहले जैसा माहोल नही है
मोहल्ला पड़ोस में क्या होता है ।
आपस में नही कोई जानता
यही सोचकर  दुख होता है ।
हाल चाल की बात न पूछो
मानवता अब नही दिखती है ।
रास्ते में कोई मिल जाये तो
बात किसी की नही होती है ।
सिर झुका कर निकल जाते है
अंजाने से आपस में लगते है ।
बात करने का समय न रहता
अंजाने बनकर निकल जाते है  ।
हाय हलो करने का भी अब
समय किसी के पास नही है ।
कैसा व्यस्त हुआ जीवन है
या मानवता अब बची नही है ।
सब अपने को बड़ा समझते
कौन बड़ा है नही जानते
बड़े बुजुर्गो को बोझ समझते
मान सम्मान किसी का न करते ।
आज के समय का यही हाल है
तभी तो सबका हाल बेहाल है ।
समय को दोष अब क्यो देते हो
समय के साथ क्यो नही चलते हो ।
संयम धैर्य से काम न लेते
मन मर्जी से सब चलते हैं ।
बात कोई जब बिगड़ जाय
तब फिर क्यो ये पछताते हैं ।
अनन्तराम चौबे

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