#Kavita by Anantram Chaubey

जीवन पथ पर

जीवन पथ पर चलना सीखा
गिरना और संभलना सीखा
गिरे उठे  फिर आगे बढ़कर
कदम बढाकर चलना सीखा ।

राह कठिन थी मंजिल की
पथ में कांटे विछे हुए थे
आसान नही था जाना फिर
भी भले वहाँ पर कांटे थे ।

मंजिल बड़ी कठिन होती है ।
राह चलो तब पता लगती है ।
चलते जाओ बढते जाओ
आगे राहें मिलती जाती है ।

हार मानकर बैठ गये तो
मंजिल कभी न पाओगे ।
हिम्मत करके चलते जाओ
मुश्किल आशा कर पाओगे ।

कर्म करो तो फल  मिलेगा
बैठे बैठे नहीं काम चलेगा ।
हिम्मत जो दिल में रखते है
फल खाने को उन्हे मिलेगा ।

हिम्मत करके बढ़ते जाओ
मंजिल  मुश्किल  होती है ।
हिम्मत कर लो कठिन काम
में सफलता भी मिल जाती है ।
अनन्तराम चौबे
अनन्त

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