#Kavita By Anantram Chaubey

उम्मीद जगाई है

उम्मीद जगाई है
जो दिल में
बस उम्मीद
लगाये बैठा हूँ ।
बस चाहत है
उस मंजिल की
दिल थामकर
अपना बैठा हूँ ।
आस जगाई
हिम्मत बधाई
मंजिल की भी
राह दिखाई ।
वो ही दाता
बनकर आये ।
दिल में एक
उम्मीद जगाये ।
जिस मंजिल पर
चल निकले थे
उस मंजिल तक
भी पहुचाये ।
शत शत नमन
वंदन करते है ।
उस मंजिल पर
फिर चलते है ।
अनन्तराम चौबे
अनन्त
जबलपुर म प्र

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