#Kavita by Anantram Chaubey

धूप

 

धूप है छांव है

एक छोटा सा

गांव है ।

जहाँ रहते है ।

मिल करके

सब सीधे साधे ।

गांव के वो किसान

सीधे सच्चे इन्सान ।

धूप हो या छांव हो

खेती वो करते है ।

तन पर लगोटी

बहता है पसीना ।

जेठ हो या वैशाख

गर्मी का महीना ।

खेतो से अनाज

करते है पैदा ।

आलू प्याज भी

करते है पैदा ।

कड़ी धूप मे

बहता पसीना ।

आराम करना हो

मिलता है बस

पेड़ो का ठिकाना ।

धूप हो दोपहर

चलती लपट हो ।

काम तो बस ऐसा

ही चलता रहता है

जब तक सूरज

ढलता न हो ।

किसान के जीवन

का यही सुन्दर सपना ।

खेतो मे अपना

जीवन बिताना ।

धरती विछौना है

धरती उढौना है ।

धूप और छांव से

कभी नही डरना है ।

अनन्तराम चौबे

*अनन्त *

जबलपुर म प्र

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