#Kavita by Anantram Chaubey

माँ दिवस

 

माँ दिवस है

कि मदर्स डे

कुछ समझ

नही पा रहा हूँ।

सारे पटल

हिन्दी साहित्य

को बढावा

देने की बात

करते है ।

सोच नही

पा रहा हूँ

माँ दिवस

अच्छा नही

लगता है ।

तभी तो

मदर्स डे के

नाम से

कविता

लिख रहे है ।

माँ को भी

भूल रहे है ।

माँ को माँ

कहने मे

सरमा रहे है ।

भारत माँ की

सभ्यता को

भूल रहे है ।

माँ को

मदर कहो

मोम कहो

मम्मी कहो

माँ सब कुछ

सुन लेती है ।

माँ तो माँ है

अपने बच्चो को

माफ कर देती है ।

अनन्तराम चौबे

जबलपुर म प्र

Leave a Reply

Your email address will not be published.