#Kavita by Anantram Chaubey

हेर फेर

 

हेर फेर के चक्कर

मे अक्सर इन्सान

लगा रहता है  ।

ये तेरा है ये मेरा है ।

हर पल यहाँ

भटकता रहता है ।

जीवन है संग्राम यहाँ

हर पल मुश्किल होता है ।

कांटो का ताज पहिनकर

हर इन्सान यहाँ पर जीता है ।

सुख दुख जीवन मे

आते जाते रहते है ।

थोडा़ सा दुख आन पड़े

उसे झेलने मे रोता रहता है ।

रोज पेट भर खाता है

एक दिन एक समय पर

मिले न खाना सबको

यही बताता फिरता है ।

ऐसा है इन्सान यहाँ पर

एक समय मिले न खाना

बहुत परेशान रहता है ।

मोह माया के चक्कर मे

दिन रात भटकता रहता है ।

हेर फेर की चाहत मे

क्या से क्या करता रहता है ।

पाप पुण्य सब भूल यहाँ पर

हेरा फेरी करता रहता है ।

बेटा बेटी पत्नी भाई के

रिश्ते नातो मे बंधकर

यहाँ वहाँ भटकता है ।

जमीन जायजाद पैसों

के चक्कर मे हेरा फेरी

बस करता रहता है ।

आया अकेला जाय अकेला

फिर भी करता रोज झमेला

लेकर न कुछ आया है

न कुछ लेकर ही जायेगा

मोह माया के सब बंधन

यही छोड़ कर जायेगा ।

हेरा फेरी और लालच को

बस यही छोड़ मर जायेगा ।

अनन्तराम चौबे

* अनन्त *

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