#Kavita by Anantram Chaubey

विश्वाशघात

 

विश्वाशघात

करे जब कोई

सीधे दिल पर

चोट लगती है ।

अपने ही अक्सर

ऐसा करते है ।

यही बात तो खलती है ।

दूर के रिश्तो की छोडो

सगे भाई भी ऐसा करते है ।

सम्पत्ती के वटवारे मे

अक्सर ऐसा करते है ।

जर जोरू जमीन के

खातिर अक्सर ही

ऐसा होता है ।

माता पिता के साथ मे

जो भाई घर पर रहता है ।

शहर मे दूर नौकरी करने

वाले भाई साथ ये करता है ।

पिता के न रहने पर

अक्सर ऐसा होता है ।

वहला फुसला करके

माँ को भाई के साथ ही

माँ को भी धोखा देता है ।

माँ को ही विश्वाश मे लेकर

विश्वाशघात वो करता है ।

न वो बेटा माँ का है

न भाई का भाई होता है ।

विश्वाशघात करे जो अपनो

से अपना नही वो होता है  ।

ऐसा विश्वाशघाती ही

किसी को भी धोखा देता है ।

ये तो घर की बात है यारो

दोस्त यार पत्नी के साथ

भी अक्सर ऐसा होता है ।

विश्वाश करो किस पर यारो

विश्वाशघात जब होता है ।

अनन्तराम चौबे

* अनन्त *

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