#Kavita by Anantram Chaubey

जिस्म मे  ।।क्षणिका ।।

 

गली की

बंजारिन

गलियो

मे नही ।

जिस्म मे

राज

करती है ।

मोहब्बत

की सौगात

आँखो से

झलकती है ।

इन्तजार का

मजा ही

कुछ और है

बस  पल

पल मे बैचेनी

बढती है ।

जब किसी

की याद

अकेले मे

सताती है ।

मीठा दर्द

देकर रूलाती है  ।

 

अनन्तराम चौबे

* अनन्त *

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