#Kavita by Anantram Chaubey

विद्यार्थी व बस्ता

 

विद्यार्थी व बस्ता

बस्ता नही कंधो

का दिन पर दिन

बोझ बन गया है ।

नई शिक्षा नीति

नई टेक्नालाजी

ये कम्प्यूटर

ये लप्टाप की

नई नई तकनीकि ।

जो घंटो का काम

मिन्टो मे करते है ।

फिर भी विद्याथियों

के कंधो का बोझ

क्यो कम नही होते है ।

ये सच है स्कूल से

बच्चो का भविष्य

बनता विगड़ता है ।

मगर यह बस्ते का

बोझ जीवन भर

के लिये ढोते ढोते

ऐसे ही गुजरता है ।

स्कूल कालेज मे

किताबो का बोझ

कंधो पर ढोते है ।

फिर नौकरी का बोझ

फिर शादी को बोझ।

जो पत्नी व बच्चो की

जरूरतो का बोझ  ।

ढोते रिटायर हो जाते है ।

ऐसे विद्याथियो के

बस्ते के बोझ से

जिन्दगी ऐसे ही

गुजरती जाती है  ।

बोझ की आपाधापी

जीवन भर चलती है ।

अनन्तराम चौबे

* अनन्त *

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