#Kavita by Anantram Chaubey

प्यासा

 

पानी से प्यासा

सारा जहाँ है ।

नदी नाले तालाब

और सब कुआँ है ।

बरसात का मौसम है

बारिश बस रिमझिम है

न चमक रही विजली

न बादल बरसते है ।

नदी और नाले

सूखे पड़े है

कुऐ भी सारे

खाली पड़े है ।

खेत और तलाब

बारिश बिन सब

सूखे पड़े है ।

पनघट भी ऐसे

खाली पड़े है ।

मौसम बरसात का है

बरसात नही हो रही है

सारा जहाँ प्यासा है  ।

उमड़ते घुमड़ते इन

बादलो से आशा है ।

किसान का निराश मन

बादलो को देखता है

आशा और निराशा

की धूप छांव देखता है ।

साजन बिन सजनी

भी ब्याकुल लगती है ।

तन मन की प्यास बुझे

बारिश जब होती है ।

अनन्तराम चौबे

*अनन्त *

जबलपुर म प्र

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