#Kavita by Anantram Chaubey

मौत के सौदागर

 

मौत का सौदागर

कौन है यह कहना

बहुत मुश्किल है ।

मौत का फैसला

न्याय की अदालतो

में बैठे जज करते है ।

साक्ष्य गवाहो की

पैरवी से निर्णय होते है  ।

पुलिस केश बनाती है

बकीलो की जिरह

अदालत मे होती है ।

जज महोदय सबूतों

गवाहो  के कथन पर

अपनी बुद्धि विबेक

से निर्णय करते है ।

सबूत गवाह न मिले

मौत के सौदागर

बेगुनाह छूट जाते है ।

वैसे भी न्याय की

इन अदालतो मे दश

बीस साल केश चलते है ।

न्याय पाने की आश मे

केश लड़ते लड़ते

कुछ तो  ईश्वर को

भी प्यारे हो जाते है ।

कौन मौत का सौदागर है

इसके निर्णय अदालतो

में नही  हो पाते है ।

कानून की पेचीदियो

मे ही फसे रह जाते है ।

और मौत के सौदागर

खुले ऐसे ही आम घूमते है ।

अनन्तराम चौबे

* अनन्त *

जबलपुर म प्र

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