#kavita by Anantram Chaubey

सुबह से शाम

 

सुवह

से शाम

शाम से

रात तक

न जाने

कितनी बार

उनकी एक

झलक पाने

आँखे विछी

रहती  है।

किसी दीवाने

की तरह

आस लगाये

रहती हूँ ।

कभी तो

वोआयेगे

अपनी

एक झलक

दिखायेगे ।

खोये हुये

अरमानो

को पूरा

कर जायेगे

सपनो की

खुशियाँ

साकार

कर जायेगे ।

 

अनन्तराम चौबे

*अनन्त *

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