#Kavita by Anantram Chaubey

अकड़

मुशीवत जब आती है
अच्छो अच्छो की अकड़
ठिकाने लग जाती है ।
अकड़ और सज्जनता
की विपरीत है महत्वता ।
अकड़ता इन्सान को
अकेला कर देती है ।
दूसरे को छोड़ो अपनो
से ही अलग कर देती है ।
अक्सर मवाली गुण्ड़े ही
अपनी अकड़ मे रहते है ।
समाज के विरोधी होते है ।
मानवता सज्जनता भूलकर
समाज के दुश्मन होते है ।
छोटी छोटी बातो में
अपनी अकड़ दिखाते है ।
इन्सानियत को भूल
दरिन्दे बन जाते है ।
बात बात में सभी को
चाहे माँ बहिन बेटी
हो अपमानित करते है ।
इन्सानियत से भटककर
इन्सानो को भूल जाते है ।
अपनी अकड़ मे भूले रहते है ।
समाज इन्सानो के साथ
अकड़पन नही चलती है ।
सज्जनता इन्सानियत ही
कदम कदम पर साथ देती है ।
इन्सान को इन्सान ही
हमेशा बनाये रखती है ।
यही आम आदमी की
असल जिन्दगी होती है ।
इन्सान की मानवता
और महानता होती है ।
अनन्तराम चौबे
*अनन्त *

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