#Kavita by Anantram Chaubey

हिन्दी का सम्मान करो
हिन्दी का सम्मान करो
न इसका अपमान करो
हिन्दी मिलके सब अपनाओ
भेदभाव न दिल में लाओ ।
क्षेत्रीय भाषाये अपनी जगह है
मेल नही कोई न होती है ।
अलग अलग इनकी बोली है
हिन्दी की शान निराली है ।
सस्कृत की ही ये बेटी है
हिन्दी तो माँ जैसी है ।
हिन्दुस्तान में बोली जाती
सुन्दर और अनोखी है ।
सभी भाषाओ से मेल खाती है
ज्यादा हिन्दी बोली जाती है ।
फिर भी इसका दुर्भाग्य रहा है
राज भाषा ही बनकर रह गई
राष्ट्र भाषा नही अभी बन पाई ।
देश में सब भाई भाई है
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई है ।
सब में भाई चारा रहता
आपस में भले लड़ते है
फिर भी एक हो जाते है
भाषाओ की आपस की लड़ाई
क्यो  नही सुलझा पाते है ।
काम नही ये मुश्किल लगता
आपस मे हल क्यो नही करते है ।
एक राष्ट्र हो एक भाषा हो
देश की एक हिन्दी भाषा हो ।
नमन और वन्दन करते है
हिन्दी भाषा सब अपनाते है ।
दृढ सकल्प सभी करते  है
राष्ट्र भाषा हो कसम खाते है ।
अनन्तराम चौबे
* अनन्त *
जबलपुर म प्र

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