#Kavita by Anantram Chaubey

घर नही खण्हर

वो घर तो घर नही होता है
जिस घर में इन्सान नही होता है ।
घर को सुन्दर इन्सान बनाता
इन्सानो से घर सुन्दर लगता ।
इन्सानो की सोच बदल गई
इन्सानो की कदर न रह गई
कुत्तो को गाड़ी में घुमाते है
ए सी कूलर में रखते है
विस्तर में गद्दे पर सुलाते है
देख रेख कुत्ते के खातिर
घर में एक नौकर भी रखते है।
इन्सान भले भूखे रह जाये
कुत्तो को हैं दूध पिलाते है।
पेड़ पौधो जानवरो को
इन्सान से ज्यादा महत्व देते है
अपने ही बूढे माता पिता को
घर से बाहर आश्रम मे भेजते।
जिस घर में इन्सान न हो
वो घर नही रह जाता है
इन्सानो के बिना घर वो
घर नही ,वो  खण्हर ही
बन  कर रह जाता है ।
पेड़ पौधो पक्षियो से भरा
जंगल बनकर रह जाता है ।
अनन्तराम  चौबे
*अनन्त *
जबलपुर म प्र

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