#Kavita by Anantram Chaubey

मंहगाई की मार

मंहगाई की मार
फिर भी चुप है
शासन प्रशासन
और सरकार ।
मंहगाई से हर वस्तुऔ
के दाम आसमान छू रहे है ।
हैरान परेशान सभी
आँसुओ के घूंट पी रहे है ।
मंहगाई की मार से रो रहे है ।
सरकार गरीबो और
अमीरो की सोचती है  ।
मध्यम वर्ग की बात आये
आँख कान बन्द कर लेती है ।
अमीरो को मंहगाई से
कोई लेना देना नही है
उद्योगपति खुश है
मंहगाई घटाना बढाने
उन्ही के हाथ में होता है ।
सरकार तो जातिगत गरीबो
को सब सुविधा दे रही है
राशन दुकानो में गेहूँ चांवल
दो तीन रूपया किलो देती है ।
हरे पीले कार्डो पर
हर सुविधा देती है ।
बच्चो को स्कूल में किताबे
फ्री फीस माफ करती है ।
कम नंबर पाने में पास होते है ।
कालेजो में कोटे पर
एडमीशन दे देते है ।
नौकरी पाने प्रमोशन
मे भी कोटा मिलता है ।
सरकारी अस्पतालो में
फ्री मे  डिलीवरी होती है ।
देख रेख के लिये एक
मुस्त रकम भी मिलती है ।
शादियाँ भी कन्यादान
योजना में हो जाती है ।
खर्च को रकम भी मिलती है ।
गरीब न अमीर न सरकार
को मंहगाई से फर्क पड़ता है ।
मध्यम वर्ग मंहगाई की मार से
परेशान हो क्या फर्क पड़ता है ।
थोड़ा चीखते चिल्लाते है
फिर कुछ दिनो में अपने
आप ही शांत हो जाते है ।
अनन्तराम चौबे
*अनन्त *

Leave a Reply

Your email address will not be published.