#Kavita by Anantram Chaubey Anant

पिता पुत्र कि स्वार्थ

 

पिता पुत्र का

ये कैसा स्वार्थ है ।

मृत माँ को भी

नहीं वक्सा है ।

पेपर में छपी खबर

पढ़कर मन ग्लानी से

विचलित हो गया ।

पेंशन के  स्वार्थ ने

पिता पुत्र को

ऐसा गिरा दिया

जान बूझकर ऐसा

घृणित अपराध किया ।

तीन वर्ष तक मृत माँ

को फ्रिज में बन्द रखा

माँ का अँगूठा लगवा

कर पेंशन लेते रहे ।

क्ररता की हद को

पार करते रहे ।

में तो कहूँगा ये

पिता पुत्र एक मृत

महिला की पेंशन नही

खून पीते रहे

मास के टुकड़े खाते रहे ।

कुत्ते कौऔ की तरह

लोचकर खाते रहे ।

वो मृत महिला न

किसी पुत्र की माँ थी

न किसी पति की पत्नी थी ।

बस भूखे भेड़ियो को

पेन्शन के पैसो की

चाहत बरकरार थी ।

मृत माँ के लिये

न कोई पुत्र था

न कोई पति था ।

वो तो मोह माया

छोड़ चली गई थी ।

हाँ सान्सारिक क्रिया

कर्म न होने से शायद

आत्मा मोक्ष पाने के लिये

आसपास भटक रही थी ।

अब जब भेद खुल गया

क्या कहानी बतायेगे

इस पिता पुत्र ने

सच न बताया तो एक

नई कहानी सुनायेगे ।

पकड़े तो गये है

इस घिनौने कृत्य

की सजा तो पायेगे ।

अनन्तराम चौबे

* अनन्त *

जबलपुर म प्र

9770499027

 

 

 

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