#Kavita by Anantram Chaubey Anant

झुकी निगाहे

 

झुकी निगाहे

अपने ही आपसे

कुछ कह रही है ।

गुलाब से खिले चेहरे

पर किस बात की

मायूसी झलक रही है ।

चेहरे पर छाया अधेरा

रोशनी की तलाश है ।

मन मे किसी की आस है ।

खोजती ये निगाहे मे

उम्मीद झलकती है ।

झूले मे झूलती परछाई

बहुत कुछ  कहती है ।

ठंड़ी हवा के झोको

चेहरे को स्पर्श करते है ।

मन की गहराइयो को

छूकर ठंडक देती है ।

किसी की यादो को

ताजा करती है ।

झूले पर झूलना

मन को बहलाना

हवाओ का छेड़ना

सुन्दर है सुहाना ।

पेड़ की छाँव मे भी

धूप की किरणे

तन को स्पर्श कर

मन ही लुभाती है ।

किसी की यादे

ताजा कर जाती है ।

खुले बालो की लटें

मंद मंद हवाओ से

गालो को चूमती है  ।

सीने मे ढकी चुनरी

से खेलती है  ।

तन से हटाती है ।

ठंडे स्पर्श से मन

को लुभाती है ।

किसी की यादो को

ताजा कर जाती है ।

सुहाने सपने दिखाती है ।

झुकी झुकी निगाहे

बहुत कुछ कहती है ।

अनन्तराम चौबे

* अनन्त *

जबलपुर म प्र

9770499027

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