#Kavita by Anantram Chaubey

अंधा कानून

 

कानून अंधा है

ये सच है कि

कानून अंधा है ।

ये बात सिर्फ में नहीं

जो भुक्त भोगी है

वह तो कहता ही है ।

हर कोई कहता है ।

देश का कानून अंधा है ।

अंधा तो है ही वहरा

लँगड़ा भी है ।

न देख सकता है

न सुन सकता है

न कह सकता है

चल सकता है ।

वैसाखी के सहारे

धीरे धीरे से चलता है ।

न्याय मिले न मिले

फैसले में ही दस

बीस तीस साल

भी लग जाते है ।

फैसले से जो

संतुष्ट नहीं है ।

आगे बडी अदालतो

में अपील करते है ।

फैसला होने के वाद

भी न्याय नहीं मिलता है ।

सबूतो गवाहो की बकीलो

जिरह की पर वैसाखी

तारीख पर तारीख

मिलती रहती है  ।

कुछ गवाह मर जाते है ।

कुछ सबूत मिट जाते है

कुछ गवाह खरीद भी

लिये जाते है ।

कुछ धमकियौ से

डर जाते है ।

कुछ गवाही देकरभी

बदल पलट जाते है ।

कुछ गुनाहगार संदेह

की हालत मे छूट जाते है ।

कुछ नावालिग होने का

फायदा उठाते है । ।

कुछ सजा हो जाने के

वाद जमानत पाकर

छूट जाते है ।

न्याय की ऐसी लम्बी

प्रक्रिया से कुछ गुनाह

गारो की न्याय पाने

बालो की मौत भी

हो जाती है ।

अंधे कानून की

इस लड़ाई में वकील

पुलिस बाबूओ को

पैसा देते देते ज़मीन

जायजाद विक जाती है ।

कुछ लोग  कोर्ट और

वकीलों की महंगी फीस

से हिम्मत हार कर

केश ही नहीं लगाते है ।

या लगाकर भी फिर

वापिस ले लेते है ।

अंधे कानून से डर जाते है ।

    अनन्तराम चौबे  * अनन्त *

     जबलपुर म प्र – 9770499027

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