#Kavita by Anil Uphar

स्मृति के खंडबिम्ब

और कौंधते शब्द

नित देते

मेरी सर्जना को

संदर्भ ।

ठीक उसी तरह

सावन की पहली बून्द ने

लिख दिया था

मिलन के पृष्ठ पर

अलसायी सुबह का सच ।

गवाह है वो हस्ताक्षर

जो आज भी दर्ज़ है

सुनहरी यादों के दस्तावेज पर ।

 

अनिल उपहार

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