#Kavita By Ankit Gujrati Raqeeb

सिर पर भारी बोझ उठाये चलता है
जिससे सारे कुनबे का पेट पलता है

आंगन से बाहर नहीं निकल पाती
बेटी का आंचल ना होना खलता है

दिन भर कड़ी धूप में वो बदन जलाये
तब कहीं घर का चूल्हा जलता है

कोई मेहमां गर कभी आ जाये
रोटियां बांट कर खुद को छलता है

और अब “आभा” क्या कहूं क्या मिले
घर से ना निकलूं तो कल नहीं मिलता है..
आभा…

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