#Kavita by Annu Laguri

अक्सर गली के चौराहे पर…..!

वह घूरती नीली सी नजर

ठिठका जाती कदमों को मेरे….!

पल को जड़ हो जाता मै।

और लगता चोरी से…..

निहारने उसे,

वो बिखरे बालों वाली

फटे चिथड़ो से,

तन को लपेटने वाली….!

यौवन की और अग्रसर

वह पगली मुझे…!

अनायास ही खींच लेती..अपनी और.!

ओर मैं बावरा,

पल मैं उसके रोने,

पल मे उसके हंसने …!

की जादूगरी को देख..!

मन ही मन मुस्करा देता

और पास जाकर पूछ बैठता

रोटी खाई तुमने…?

क्या तुम्हें भूख लग रही हैं..?

और वो,

ना जाने कौन से आछुञ…

अनुभुति लिए कहती मुझसे…

धत्त बाबू…!

अनु

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7 thoughts on “#Kavita by Annu Laguri

  • August 27, 2017 at 8:48 am
    Permalink

    ati sundar rachna…

  • August 27, 2017 at 3:57 pm
    Permalink

    Very nice.
    Heart touching..

  • August 29, 2017 at 11:40 am
    Permalink

    हार्दिक धन्यवाद सर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए

  • August 29, 2017 at 12:15 pm
    Permalink

    बहुत आभार अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए

  • August 29, 2017 at 12:17 pm
    Permalink

    बहुत आभार अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए सर

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