#Kavita by Aparna Shiv Sharma

खुशियाँ कम और अरमान बहुत हैं ।

जिसे भी देखो परेशान बहुत है ।।

 

करीब से देखा तो निकला रेत का घर ।

मगर दूर से इसकी शान बहुत है ।।

 

कहते हैं सच का कोई मुकाबला नहीं ।

मगर आज झूठ की पहचान बहुत है ।।

 

मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी ।

*यूं तो कहने को इन्सान बहुत है

 

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