#Kavita by Archana Shaili Dubey

हे राम! अवध में फिर आओ 🙏
राह निहारे प्रजा तुम्हारी ,
टेर सुनो हे अवध बिहारी!
अमर्ष हरो अघ ताप मिटाओ,
हे राम! अवध में फिर आओ।

आकुल मानस व्यथा घनेरी,
अष्मिता नारि की तम ने घेरी ।
पुनि खोया सम्मान दिलाओ,
हे राम !अवध में फिर आओ।

बहु संख्यक अब फिरें
निसाचर,
कुपंथ चले सुपंथ छांडिकर।
भुवि का भार आन मिटाओ,
हे राम! अवध में फिर आओ।

मर्यादा का भान कहाँ अब,
आख़िर उबरेगी नारी कब
करुँ अर्चना वंदन तुमसे
हे राम! अवध में फिर आओ।
✒| अर्चना शैली दुबे |
फरीदाबाद

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