#Kavita by Arun Kuma Arya

माता निर्माता
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प्रश्न चिह्न क्यों उठता माँ तुझ पर
निर्माता निर्माण की सोच रखता
कैसे हो संतान का अपने निर्माण
माँ का हमेशा यही चिन्तन रहता।

रख बच्चे के लिए अपना हिस्सा
अपनी इच्छाओं को दबा देती है
तुम खा ली माँ,बच्चे के कहने पर
हाँ कह,झूठ का आश्रय लेती है।

रात रात जागकर रोने नहीं देती है
गुस्सा नहीं उसे बच्चे पर आता है
लोरियाँ सुना थपकी देकर सुलाती
बचपन में बच्चों को बहुत भाता है।

तोतली बोली पर हँस लेती बलाएं
शुद्ध उच्चारण का पाठ हमें पढाती
अँगुली पकड़ चलाने में प्रसन्न होती
क्या क्या कैसे कितने कष्ट उठाती।

भ्रमण करे क्यों कोई इधर उधर बन्दे
क्यों लगाए पहाड़, जंगल, के फेरे
भगवान ढूँढता मूरख किस कोने में
पास बैठी महादेवी माँ बगल में तेरे।

माँ साक्षात देवी,नव दुर्गा से महान
दुनिया का कोना गाता तेरा गुणगान
किस स्थल पर रख करुँ तेरी अर्चना
मन मन्दिर में बसी बन तू भगवान।

तेरा जाया यह सुन्दर तन अनमोल
गोद में ले तूने इसे क्या खूब सँवारा
दुनिया में सबसे प्रिय है तेरा ललना
सीने से लगा कहती है मेरा दुलारा।

हे देवी,वन्दनीय,तू विश्व विधाता है
ऊऋण तुझसे कैसे हो कोई मानव
आर्य” सबने ही पाया जीवन माँ से
नर,देव या हो कोई धरा पर दानव।

अरुण कुमार आर्य
पं०दीन दयाल उपाध्याय नगर (मुगल सराय) चन्दौली।

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