#Kavita by Arun Kumar Arya

श्रावणी का स्वरुप

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श्रावणी का महत्व

 

चातुर्मास्य का माह श्रावण पावन

करते थे श्रवण श्रुति का श्रेष्ठ जन

धूम उठता था यज्ञ का देश में पूरे

यज्ञ से करते थे हम शुद्ध पर्यावरण।

 

गूँजती थी ऋचाएं घर घर में सबके

करते थे वेदों का सब पठन पाठन

संस्कृति का होता था प्रचार,प्रसार

विश्व में वैदिक धर्म सबसे पुरातन।

 

ऋषि,महर्षि थे सब ज्ञानी,विज्ञानी

प्रकृति के कण कण का था उन्हें ज्ञान

दर्शन हमारे बता रहे पूरे संसार को

था हमारा भारत देश विश्व गुरु महान।

 

सब जन मिल रहते थे हिल मिल

वृद्ध जनों का होता था खूब सम्मान

सभ्यता अति उत्तम प्राचीन हमारी

शुद्ध ,सात्विक था हमारा ख़ान पान।

 

संस्कार सीखते थे बच्चे वृद्धों से

संस्कारी पाता समाज में सम्मान

संस्कार हीन का नहीं कोई महत्व

पढ़,लिख पाए हों चाहे कितनों ज्ञान।

 

नारियाँ देवी कहलायीं भारतवर्ष में

राष्ट्र निर्माण में था उनका योगदान

गार्गी,शकुन्तला अपाला,घोषा,लोपा

आज भी करते सब उनका गुणगान।

 

वनस्थली में बैठ वानप्रस्थी जन

करते थे ज्ञान,विज्ञान का सृजन

सन्यासी बन देते थे अध्यात्म ज्ञान

शान्ति दूत को करते थे सब नमन।

 

ज्ञान प्राप्त करने आये विदेशी यहाँ

मेगास्थनीज,ह्वेनसांग जैसे ज्ञानी

सिकन्दर सिर झुकाया ज्ञान समक्ष

ज्ञानियों के ज्ञान की लोहा मानी।

 

वेदों के ऋचाओं के आलोक से

आलोकित था यह संसार सारा

आर्य “चाहते हो शान्ति विश्व में

बोलो वैदिक धर्म की जय का नारा।

 

अरुण कुमार “आर्य”

प्रधान,आर्य समाज मन्दिर

मुग़ल सराय,चन्दौली।

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