#Kavita by Arun Kumar Arya

गौरवमयी बेटियाँ

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साधिकार सज आ बैठी लेखनी पर

सरस्वती बन लिखने लगी इतिहास

शक्ति दुर्गा बन छायी जगत में नारी

लक्ष्मी बन लायी ओठों पर मिठास।

 

गार्गी का ज्ञान गूँजा जनक दरबार

कैकयी देवासुर संग्राम बनी चण्डी

सीता ठुकरायी राजसुख श्वसुर की

कौरव नाश में,पांचाली हुई घमण्डी।

 

भारत भाषित हुआ चक्रवर्ती भरत से

शकुंतला वीरता का उसे पाठ पढ़ायी

वंशज उनके थे यशस्वी वीर पाण्डव

कुन्ती ने जिनमें सम्मान भाव जगायी।

 

मूरा थी चन्द्रगुप्त मौर्य की जननी माँ

पुत्र के लिए अतिशय कष्ट उठायी

अशोक का कराने में राज तिलक

माँ ने उसकी अपनी प्राण गँवायी।

 

कोई मीरा रानी बनी कृष्ण की दासी

कोई दुर्गावती बन उठायी तलवार

सारन्धा थी माँ वीर छत्रसाल की

मुगलों के सीने पर चढ़ी ले कटार।

 

जीजा बाई जोश भरी शिवा जी में

मुगलों को तौला जिसने तलवारों से

औरंगज़ेब के देखते रह गये सैनिक

मुक्त किया राष्ट्र को दुष्ट मक्कारों से।

 

इन्दिरा गाँधी क्या कम थी किसी से

गोलियों तोपों से बांग्ला देश बनायी

ठगा देखता रह गया पाकिस्तान सारा

बुद्धि किसी की तनिक काम न आयी।

 

कल्पना चावला पाने को चली गगन

सुनिता खोज लायीआकाशीय रहस्य

कर रहीं सीमा की सुरक्षा आज बेटियाँ

नहीं दिखता उनमें कहीं कुछ आलस्य।

 

हर ओर  उनके जलवे दिखते विश्व में

उच्च पदों पर है विराजित उनकी काया

कहीं प्रतिभा पाटिल,मीरा,ममता,स्मृति

किसी से कम नहीं सुषमा,सुमित्रा,माया

 

उषा, साक्षी, साइना ,सानिया ,सन्धु

खेलों मे विश्व में लोहा अपना मनवायी

खेल के मैदान में फहरा तिरंगा प्यारा

गूँजाया राष्ट्रगान,देश का मान बढ़ायी।

 

कविता गूँजी सुभद्राचौहान महादेवी की

सरोजिनीअमृता प्रीतम का क्या कहना

ऊर्मि ,गीतांजली से बही ज्ञान की गंगा

नारियाँ है देवी ,करते हम उनकी वंदना

 

बेटियाँ आज की, कल बनेंगी वह माँ

सृजन करेंगी ललना राष्ट्र हेतु गर्भ से

राष्ट्र निर्माता रहीं सदा से ये नारियाँ

क्या क्या लिखें, हम किस सन्दर्भ से।

 

गृह स्वामिनी बनती आयीं ये सदा से

पन्ना राष्ट्र हित दी पुत्र चन्दन की बलि

आर्य”त्याग की मूर्ति होती प्रिय बेटियाँ

मुरझाए गर्भ में यह क्यों कोमल कलि।

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